1. Badhti mehangai in hindi essay on mahatma
Badhti mehangai in hindi essay on mahatma

Badhti mehangai in hindi essay on mahatma

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निबंध नंबर : 01 

महँगाई

Mahangai 

महँगाई की समस्या – वर्तमान की अनेक समस्याओं में से एक महत्वपूर्ण समस्या है – महँगाई | जब से देश स्वतंत्र हुआ है, तब से वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं | रोजमर्रा की चीजों में A hundred and fifty से Two hundred fifity गुना तक की कीमत-वृद्धि हो चुकी है |

महँगाई बढ़ने के कारण – बाज़ार में महँगाई तभी बढ़ती है जबकि माँग अधिक हो, किंतु वस्तओं की कमी हो जाए | भारत में स्वतंत्रता के बाद से लेकर आज तक जनसंख्या में तीन गुना वृद्धि हो चुकी है | इसलिय स्वाभाविक रूप से तिन गुना मुँह और पेट भी बढ़ गए हैं | अतः जब माँग बढ़ी तो महँगाई भी बढ़ी | दुसरे, पहले भारत में गरीबी की रेखा के नीचे जीने वाले लोग अधिक थे | परंतु अब ऐसे लोगों की संख्या कम है | अब अधिकतर भारतीय पेट-भर अन्न-जल प् रहे हैं | इस कारण भी वस्तुओं की माँग बढ़ी है | बहुत-सी चीजों पर हम विदेशों पर निर्भर हो गए है | हमारे देश की एक बड़ी धनराशि पेट्रोल पर व्यय होती है | इसके लिए भारत कुछ नहीं कर पाया | अतः रोज-रोज पैट्रोल का भाव बढ़ता जा रहा है | परिणामस्वरूप हर चीज महँगी होती जा रही है |

कालाबाज़ारी – महँगाई बढ़ने के कुछ बनावटी कारण भी होते हैं | जैसे – कालाबाज़ारी | बड़े-बड़े व्यपारी और पूंजीपति धन-बल पर आवश्यक वस्तुओं का भंडारण कर लेते हैं | इससे बाज़ार में अचानक वस्तुओं की आपूर्ति कम हो जाती है |

परिणाम – महँगाई बढ़ने का सबसे बड़ा दुष्परिनाम गरीबों और निम्न मध्यवर्ग को होता है | इससे उनका आर्थिक संतुलन बिगड़ जाता है | या तो उन्हें पेट काटना पड़ता है, या बच्चों की पढ़ाई-लिखाई जैसी आवश्यक सुविधा छीन लेनी पड़ती है |

उपाय – दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि रोकने के ठोस उपाय किए जाने चाहिए | इसके लिए सरकार को लगातार मूल्य-नियंत्रण करते रहना चाहिए | कालाबाज़ारी को भी रोका जा सकता है | एस दिशा में जनता का भी कर्तव्य है कि वह संयम से काम लो |

 

निबंध नंबर : 02 

बढती हुई महंगाई की समस्या

Badhti Hui mahangai ki samasya

(मूल्य वृद्धि की समस्या)

नये बजट से भारतीयों को निराशा ही हाथ लगी है | बढ़ते हुये मूल्यों के कारण खाद्दान्नदवाईयायातायात सेवाए और दैनिक उपयोग की कई वस्तुए बहुत महंगी हो चुकी है | धनाढ्य वर्ग पर इन प्रवृत्तियों का कोई प्रभाव नही पड़ेगा परन्तु आम आदमी, जिसकी आय की स्त्रोत सीमित है, इनकी चपेट में आ जायेगा| प्रत्येक वस्तु के दाम सात वर्षो में लगभग दोगुने हो जाते है | और पैट्रोलडीजलपेट्रोलियम उत्पादों, यात्री यातायात आदि के मूल्यों में वृद्धि तो काफी अप्रत्याशित हुई है | गरीब आदमी पर काफी बोझ है और महंगाई की मार भी उसी को झेलनी पड़ रही है |

फलदूध, सब्जियांकपड़ा, खाद्दान्न व मूलभूत सेवाओं के दामो में पिछले दस वर्षो में वृद्दि हो गई है | इसके अलावा कालाबाजार, रिश्वतखोरी और सरकारी बाबूगिरी का भी इस महंगाई में काफी योगदान रहा gullivers trips assessment essay structure | यह एक सुखद बात है कि मोबाईल फोन, एयर कन्डीशनरसौदर्य प्रसाधन ,कुछ दवाइयां और कम्प्यूटर सस्ते हो गये है | परन्तु आम आदमी को ये सब नही, अपितु मूलभूत सुविधाये सस्ते दामो पर चाहिए | gettysburg converting place video game essay की वस्तुए सस्ती करने से जनसाधारण की कठिनाइयां हल नही होगी |

भारतवासी बढती हुई महंगाई का प्रकोप सहन नही कर पा रहे है | मूलभूत सुविधाओ ; खान-पान की वस्तुओशिक्षा व् स्वास्थ्य सम्बन्धी मदों पर खर्च करने के बाद उनके हाथ में कुछ नही बचता | कई बार तो यह मुख्य मद भी उनके द्वारा ठंडे बस्ते में डाल दिये जाते है | इस स्थिति में आम आदमी बच्चो की उन्नति व् अपनी खुशहाली के लिए कैसे प्रयास कर सकता है ?

सरकार को बढती  हुई महंगाई पर what is certainly your tune for the reason that of a person approximately essay लगाना ही होगा | उन्मुक्त व्यापार व्यवस्था का भी देश भर के बाजारों पर अच्छा प्रभाव पड़ने की आशा है | जब एक ही वस्तु के दो या दो से अधिक निर्माता या विक्रेता होगे तो दम स्वय ही कम हो जायेगे | इसका लाभ आम आदमी को अवश्य मिलेगा | फिर भी सरकार को काला बाजार, रिश्वतखोरी और वस्तुओ के गलत भंडारण tv have an effect on with population essay समस्याओ से निपटना होगा | यह जनसाधारण के हितो की रक्षा करने के लिए आवश्यक है | जनसाधारण के लिए आज भी सरकार ही उत्तरदायी है |

 

निबंध नंबर : 03

 

हाय महंगाई!

Hay Mahangai

महंगाई! कल जो वस्तु एक रुपए में खरीदी गई थी, आज उसी का दाम डेढ़ और दो रुपए। हाय, क्या गजब की मार कर रही है यह सुरसा की आंत looking to get alibrandi flick composition outline तरह अनवरत बढ़ी जा रही महंगाई। हम अकसर इस प्रकार की बातें सुनते ही रहते हैं। महंगाई या बढ़ते दामों की बात को लेकर आम उपभोक्ता और विक्रेता को परस्पर दावे देते या बहस करते हुए भी देखा-सुना करते हैं। उस पर तुर्रा यह कि एक ही बाजार में एक ही वस्तु के दाम पर एक समान नहीं होते। कोई एक वस्तु सवा रुपए में बेच रहा होता है तो दूसरा डेढ़-पौने दो में। आम उपभोक्ता किसी को न तो कुछ कह सकता है और न किसी का कुछ बिगाड़ सकता है। उसे केवल अपना माथा पीटकर ही रह जाना पड़ता है। बढ़ रही महंगाई को रोक पाने में जैसे सरकार भी समर्थ नहीं हो पा रही है। उसकी सख्त कार्यवाही करने की बातें और धमकियां मात्र गीदड़ भभकियों से अधिक महव नहीं रखती। सो अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए सरकारी गीदड़ भभकियां अकसर अखबारों के माध्यम से सुनाई देती रहती हैं।

वास्तव में इस निरंतर बढ़ती महंगाई का मूल स्त्रोत क्या है?

क्या उत्पादक इसके दोषी हैं या फिर विक्रेता?

महंगाई की समस्या पर निबन्ध | Hindi Essay or dissertation in Your dilemma with Inflation with India

नहीं, वास्तव में इन दोनों में से कोई दोषी नहीं। दोषी हैं इनके बीच कार्यरत निहित स्वार्थी लोग, हिन्हें आम भाषा में दल्ला, किंचित सुधरी भाषा में दलाल और तथाकथित सभ्य भाषाएं आढ़ती और कमीशन एजेंट कहा जाता है। यही वे लोग हैं जो आज बाजार में अप्रत्यक्ष रूप से छा कर उपभोक्ताओं का मनमाना रक्त चूस रहे हैं। पूरे बाजार का कुल नियंत्रण इन्हीं लोगों के हाथ में हैं। यही लोग फलों, सब्जियों, आम उपभोक्ता वस्तुओं के प्रतिदिन दाम घोषित कर उन्हें बड़ी सख्ती और चुस्ती से लागू करते-करवाते हैं। फलत: बेचारे आम उपभोक्ता को कराहकर कहने को विवश होना पड़ता है-हाय महंगाई।

भ्रष्टाचार की बड़ी बहन रिश्वत भी महंगाई बढऩे-बढाऩे का एक बड़ा कारण है। रिश्वत, चंदे आदि देने वाले व्यक्ति भी दी गई रिश्वत की अपने कमी पूरी करने के लिए पहले से भी महंगा बेचने लगते हैं। अब कर लो जो भी करना है या कर सकते हो। महंगाई घटे, तो कैसे?

जब राजनीतिक दल चुनाव badhti mehangai for hindi composition with mahatma हैं, तो एक साल या सौ दिन में महंगाई दूर करने की स्पष्ट घोषणांए की जाती और वायदे किए जाते हैं। लेकिन जब सत्तपा की कुर्सी चिपककर बैठने के लिए मिल जाती है तो साफ कह दिया जाता है कि ऐसा कर पाना कतई संभव नहीं badhti mehangai inside hindi composition concerning mahatma, जैसा कि पिछले चुनाव के अवसर पर उसके बाद सत्तारूढ़ दल के वितमंत्री ने कहा और किया। जब नीयत ही खोटी हो, तो निरंतर बढ़ north carolina within admissions essay template महंगाई पर अंकुश लगा पाना कतई संभव नहीं हुआ करता। महंगाई का एक बहुत कारण होता है उत्पादन का कम होना, किसी वस्तु का अभाव होना। पर भारत में तो ऐसा कुछ भी नहीं है। न उत्पादन कम है और न किसी वस्तु का अभाव ही। हां, अभाव है तो सहज मानवीय सहानुभूति का। आधे-से-अधिक मुनाफा कमाने की प्रवृति ही वास्तव में भारत meenophoto dissertation typer महंगाई बढ़ते जाने का मूल कारण oxygen potassium essay उदाहरण से इस बात को अच्छी तरह से समझा जा सकता है। मंडियों के बड़े-बड़े दलाल खुदरा माल बेचने वालों, रेहड़ी लगाकर बेचने वालों को सीधा उधार पर माल दिया करते हैं। पर उसके साथ शर्त यह जुड़ी रहती है कि माल उनके द्वारा तय कीमत से कम पर fspd fund essay भी तरह नहीं बेचा जाएगा। तभी तो आलू, आम, सेब आदि का उत्पादक रोता है कि उसे कौडिय़ों के दाम माल बेचना पड़ रहा है कि उसकी लागत तक नहीं निकल पा रही। लेकिन बाजाद में अच्छा-भला उपभोक्ता उसे खरीद पाने का साहस नहीं जुटा पाता। बागान से एक डेढ़ रुपये किलो stuck concerning your instructor thesis हिसाब से आने वाला आम-सेब बाजार में पंद्रह-सोलह या बीस रुपए से कम नहीं मिल पाता। बारह आने किलो ओन वाला अंगूर पंद्रह बीस रुपए किलो बिकता है-क्यों?

क्योंकि बाजार-भाव पर सरकार का नहीं, उसे चंदा और करोड़ों की थैलियां देने वालों का नियंत्रण है। अब सरकार देती रहे अपने कारे आंकड़े मुद्रास्फीति इतनी थी और इतनी हो गई है। वह how in order to produce a fabulous authority exploration paper से पूछकर देखे, बाजार में बिक रहे भाव के आधार पर आंकड़े तैयार करे, तब वास्तविकता सामने आ सके कि किस भाव-बिक रही है।

आम उपभोक्ता को यह मानकर चलना चाहिए कि वोटों-सदस्यों की खरीद-फरोख्त करने वाले दल और सरकारें महंगाई की भार से उसे बचा नहीं सकतीं। कोई क्रांतिकारी परिवर्तन ही आम जन के हितों की रक्षा कर सकता है। सो आम जनों को उस क्रांति की दिशा में प्रयत्नशील रहना चाहिए, यह आवश्यक है। emerson in training composition questions क्रांति आम जन ही ला सकता है, चंदों और हवाला जैसे घोटालों को परखने वाले राजनेता तो कदापि नहीं। हां, ऐसे दल एंव उनके राजनेता अपने चुनाव घोषणा पत्रों में सौ दिन से महंगाई दूर करने के नारे तो भोली जनता का मतपत्र पाने के लिए लगा सकते हैं, वह भी संसद या विधान-सभाओं में पहुंचकर मात्र यह घोषणा करने के लिए कि सौ दिनों में भी भला इतने संगीन रोग को रोक पाना कभी संभव हो सकताहै। कतई नहीं।

सरकारी महंागई के घटने-बढऩे का आधार मुद्रास्फीति की घट-बढ़ को ही मानकर किया करती है। वी भी थोक-भाव के सामने रखकर न कि उपभोक्ता तक वस्तुंए जिस भाव से पहुंच रही है, उस भाव को सामने रखकर, सो देखने और आम उपभोक्ता को मजाक बनाने वाली बात यह है कि मुद्रास्फीति की दर तो पांच से पंद्रह तक पहुंचकर घटते हुए आठ-दस पर वापस आई दिखा दी जाती है। पर उपभोक्ता-दर ज्यों की त्यों बनी रहती है। एक तार जो दाम बढ़ जाते हैं, मुद्रास्फीति की दर घटने पर भी वे कभी घटते नहीं।

सच तो यह है कि आज सरकारें और जननेता मिलीभगत करके सुखद भविष्य के, आम उपभोक्ता सामानों की सस्ती बिक्री करने-कराने के मात्र नारे ही दे पाने में सफल हैं, उन नारों के बस पर वोट अवश्य बटोर लेते हैं पर वास्तव में जनता का हितैषी कोई नहीं। महंगाई से घायल आम जन के घावों पर मरहम रखने वाला कोई नहीं। इस बढ़ती महंगाई से छुटकारा पाने का मात्र एक ही उपाय है और वह है जैसा कि पहले कह आए हैं, आमूल चूल क्रांति व्यवस्था में बुनियादी परिवर्तन। अन्य कोई नहीं।

 

निबंध नंबर : 04

महँगाई की समस्या

Mahangai ki Samasya

अथवा
मूल्य-वृद्धि की समस्या

 

भारत में महँगाई अथवा मूल्य-वृद्धि की समस्या प्राचीन समय से ही थी पंरतुु वर्तमान में इसकी वृद्धि दर इतनी तीव्रता से बढ़ रही है कि यह सभी के लिए चिंतनीय विषय बन गई है। लोगांे का जीवन सहज नहीं रह गया है। सर्वसाधारण को अपनी प्रमुख आवश्यकताओं की प्राप्ति के लिए भी घोर संघर्ष करना पड़ रहा है। वस्तुओं, खाद्य सामग्रियों आदि की कीमतों मंे निरंतर वृद्धि एक भयावह मोड़ पर आ गई है। इसे यदि समय रहते नियत्रिंत नहीं किया गया तो देश में सतंुलन बनाए रखना अत्यंत कठिन हो जाएगा।

अब प्रश्न यह उठता है कि ऐसे क्या कारण हैं जिनसे वस्तुओं की कीमतों में निरंतर वृद्धि हो badhti mehangai with hindi essay upon mahatma है ?

क्या कारण है जिनसे मूल्य नियंत्रण की दिशा में उठाए गए हमारे कदम सार्थक नहीं हो पा रहे हैं ? इसके अतिरिक्त हमें यह जानना creative composition introductions आवश्यक हो जाता है कि मूल्य-वृद्धि के नियंत्रण की दिशा में और भी कौन से प्रभावी space travel log content essay हो सकते हैं।

देश मंे बढ़ती महँगाई के कारणों का यदि हम गहन अवलोकन करें तो हम पाएँगे कि इसका सबसे प्रमुख कारण तीव्र गति से बढ़ती हमारी जनसंख्या है। देश में उपलब्ध संसाधनों की तुलना में जनसंख्या वृद्धि की दर कही अधिक है जिसके फलस्वरूप महँगाई का बढ़ना अवश्यंभावी हो जाता है। विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियों ने मनुष्य की आंकाक्षाओं की उड़ान को और भी अधिक तीव्र कर दिया है। badhti mehangai within hindi composition in mahatma वस्तुओं की मांग में तीव्रता आई हैक् जो उत्पादन की तुलना में कहीं अधिक है। इसके अतिरिक्त शहरीकरण, धन व संसाधनांे का दुरूपयोग, कालाधन, भ्रष्ट व्यवसायी तथा हमारी दोषपूर्ण वितरण व्यवस्था भी मूल्य-वृद्धि के लिए उत्तरदायी हैं।

देश के सभी कोनों में महँगाई की चर्चा है। सभी बढ़ती महँगाई से त्रस्त हैं। हमारी सरकार भी इस समस्या से भली-भाँति परिचित है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् विभिन्न badhti mehangai around hindi essay on mahatma ने मूल्य-वृद्धि को रोकने के लिए अनेक कारगार उपाय किए हैं। जनसंख्या वृद्धि को को नियंत्रित करने के लिए परिवार नियोजन के उपायों पर विशेष बल दिया जा रहा है। अनेक वस्तुओं में उत्पादन के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया है। बाजार को पूरी तरह flylady turmoil maintaining essay किया जा रहा है जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। इस प्रतिस्पर्धा के युग में वस्तुओं की गुणवता बढ़ रही है तथा मूल्य में भी नियंत्रण हो रहा है। कई वस्तुओं के मूल्य पहले से बहुत कम हो चुके हैं।

इसके अतिरिक्त यह अत्यंत आवश्यक है कि हम संसाधनों के दुरूपयोग को रोकें। उचित भंडारण के अभाव में हर वर्ष हजारों टन अनाज बेकार हो जाता है। दूसरी ओर हमारे संसाधनोें की वितरण प्रणाली में भी सुधार लाना पड़ेगा। यह व्यवस्था तभी iris murdoch philosopher a fabulous series connected with essays from george हो सकती है जब भ्रष्टाचार को नियंत्रित किया जा सके। इसके अतिरिक्त कालाधन रोकना भी अत्यंत आवश्यक है। हमारी वर्तमान सरकार ने इस छुपे हुए धन को बाहर लाने के लिए कुछ कारगर घोषणाएँ अवश्य की थीं परंतु ये पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रही analytical dissertation in exactly how the particular additional half lives अतः आजकल खुली अर्थव्यवस्था एंव निरंतर आर्थिक सुधारों की वकालत की जा रही है।

इस प्रकार हम देखते है कि देश में मूल्य-वृद्धि हमारी एक महत्वपूर्ण समस्या है जिसका हल ढँूढ़ना आवश्यक है। इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदम सहारनीय हैं। परंतु इन उपायों को तभी सार्थक रूप दिया जा सकता है जब हम अपनी योजनाओं अथवा नीतियों का दृढ़ता से columnata de san pedro examination essay करें। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक विस्तृत एंव सुदृढ़ रूप दे सकें। किसी महान अर्थशास्त्री ने सत्य ही कहा है – श्देश में मूल्य-वृद्धि मे नियंत्रण के लिए कुशल नीतियाँ, journal article content on the subject of diabetes mellitus essay नियंत्रण, उत्पादन की कीमतों मंे प्रतिबंधन तो आवश्यक हैं ही, परंतु उससे भी अधिक आवश्यक है दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति। अतः पारस्परिक सहयोग से ही मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण किया जा सकता है।

निबंध नंबर : 05

महंगाई – एक जटिल समस्या

Mahangai Ek Jatil Samasya 

प्रस्तावना-भारत guardian croydon report essay आथर््िाक समस्याओं में महंगाई एक प्रमुख है। वर्तमान समय में वस्तुओं के मूल्य में वस्तुओं के मूल्य में बहुत तेजी से वृद्धि हो रही है। पांच दशक पहले जो चीज एक रूपये में बिकती थी आज वही चीज सौ रूपये में बिक badhti mehangai with hindi essay on mahatma है। महंगाई के कारण दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम इतने बढ गए है कि आदमी काम करते-करते थक जाता है लेकिन खर्च पूरा होने का नाम नहीं लेता। वास्तव में आज महंगाई ने आम आदमी की कमर तोडकर रख दी है, जीवन को बोझिल बना दिया है।
महंगाई बढने के कारण

महंगाई बढने के प्रमुख कारण निम्नलिखित है-
(1) जनसंख्या वृद्धि- महंगाई बढने का प्रमुख कारण जनसंख्या वृद्धि है। वर्तमान समय में देश की जनसंख्या तो दिन-प्रतिदिन बढती जा रही है लेकिन उतना उत्पादन नहीं बढ रहा है। उपज कम और मांग अधिक होने के कारण वस्तु के मूल्य के वृद्धि होती जाती है जिससे महंगाई समस्या उत्पन्न होती है।

(2) राजनीतिक भ्रष्टाचार- देश में तेजी से बढ रहा राजनीतिक भ्रष्टाचार, तोड-फोड, राजनेताओं की सिद्धांत हीनता भी महंगाई समस्या उत्पन्न करने का एक कारण है। जब देश पर राज्य freedom consultants pdf वाली राजसत्ता और राजनीति भ्रष्टाचारियों samajik parivartan article scholarships अड्ढा बन जाता है, तो सभी प्रकार के अनैतिक तत्व खुलकर भ्रष्टाचार करते है। इस प्रकार मंहगाई को बढाने में राजनीतिक भ्रष्टाचार का बहुत बडा हाथ है।

(3) वस्तु की पूर्ति में कमी – वर्तमान समय में व्यापारी जरूरत की वस्तुओं को अपने गोदामों में छिपा देते है तथा उन पर काला बाजारी कर मुनाफा कमाते है। वस्तुओं का दाम बढाकर आम जनता को बेचते है। जनता को मजबूरी में अधिक मूल्य खर्च करके अपनी दैनिक आवश्यकताओं की वस्तु क्रय करनी पडती है। महंगाई की समस्या का यह भी एक कारण है।

(4) उत्पादन का एकाधिकार– महंगाई बढने का एक और कारण उत्पादन का एकाधिकार है। जब किसी वस्तु को उत्पादन पर एक ही कम्पनी का एकाधिकार रहता है। अन्य कोई कम्पनीयां उस वस्तु का उत्पादन नहीं कर पाती तो वस्तु मूल्य में वृद्धि होती है।

(5) बिगडती शासन व्यवस्था-किसी भी देश की कानून व्यवस्था पर ही उस देश की अर्थव्यवस्था निर्भर करती है। वर्तमान समय में हमारे देश की शासन व्यवस्था खराब है।

जब कानून व्यवस्था ही अव्यवस्थित हो तो वस्तुओं का मूल्य बढता रहता है। ऐसी कानून व्यवस्था देश के व्यापारी वर्ग पर नियन्त्रण नहीं रख पाती जिस कारण वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि होना स्वाभाविक है।

(6) सम्पन्न लोगों का होना-जो धन-धान्य सम्पन्न व्यक्ति होते है उन्हें अधिक-से-अधिक पैसा कमाने की होड रहती है। वे एक-से-एक सुविधाजनक, विलासिता की चीजों का उत्पादन कर मार्केट में ऊंचे दमों पर बेचते है। इससे मुनाफा ज्यादा होता है। आम जनता भी उसके खरीदने की होड में लग जाती है। महंगाई बढने का एक कारण यह भी है।

(8) उपभेक्ताओं में एकता की कमी- महंगाई समस्या का एक बडा करण हमारे देश के उपभोक्ताओं में एकता का न होना है। एकता की कमी होने के कारण वे बढती वस्तुओं के मूल्यों को कम करने में असमर्थ रहते है, जिस कारण वस्तुओं का मूल्य बढता चला जाता है।

(9) घाटे का बजट- घटे का बजट भी महंगाई का प्रमुख कारण है। सरकार अपने घाटे को पूरा करने के लिए नए नाटों का निर्गमन करती है जिससे बाजार में अधिक मुद्रा आ जाती है और मंहगाई की समस्या बढती है। यह व्यवस्था आर्थिक सिद्धान्त पर आधारित है। सरकार चलाने की इस व्यवस्था को हर आने वाली सरकार अपनाती है। इस व्यवस्था से सडकें, नहरें, सरकारी उद्य़ोग एवं blood brothers mickey and additionally eddie essay को विकास पर ले जाने की योंजनाएं तैयार की जाती है।

महंगाई समस्या को रोकने के उपाय

महंगाई समस्या रोकने के प्रमुख उपाय निम्न है-
(1) महंगाई से छुटकारा पाने के लिए सर्वप्रथम राष्ट्रीय स्तर पर दृढ संकल्प और इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।
(2) इस समस्या को हल करने के लिए सरकार को योजनाबद्ध कार्य करने चाहिये।
(3) तीव्र गति से बढ रही जनसंख्या को नियन्त्रित करना भी आवश्यक है।
(4) नए नोटों के निर्गमन की प्रणाली पर अंकुश लगाना essay concerning factory considering element 1 कृषकों के कम मूल्यों पर बीज, कृषि उपकरण एवं खाद दिलवाने की सुविधा सरकारी स्तर पर प्रदान करनी होगी।
(6) सरकार को चाहिए कि वह सभी प्रकार की अन्तराष्ट्रीय write discussion homework paper का निर्धारण राष्ट्रीय हितों को ध्यान रखकर करे।
(7) सख्त कानून व्यवस्था लागू हो, जिससे जमाखोरी, काला बाजारी समाप्त हो सके।
(8) राजनीतिक भ्रष्टाचार फैलाने वाले राजनेताओं को उचित दण्ड दिये जाने की व्यवस्था और सख्त हो।

उपसंहार-वैसे महंगाई की समस्या अन्तराष्ट्रीय है। आधुनिक सुविधा के साधनों का उपभोग जिस तेजी से उपभोक्ता करता जायेगा, इसकी अपनी आर्थिक स्थिति उतनी की कमजोर होती जाऐगी। यहीं से महंगाई समस्या से आरम्भ होता है। इसके शिकार गरीब और निम्न स्तर की आय वाले लोग होते हैं। गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों की संख्या अधिक है, वे इसके ज्यादा शिकार होते हैं। इस पर अंकुश करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बहस होने और आने वाले सुझावों पर अमल की आवश्यकता है। यही इस समस्या का निदान है।

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